सितंबर F&O सीरीज में Nifty 6.7% गिरा
भारतीय शेयर बाजार के लिए सितंबर डेरिवेटिव्स सीरीज काफी कमजोर रही। Nifty 50 में 6.7% की गिरावट दर्ज की गई, जिससे यह करीब 25 साल में सितंबर की सबसे खराब डेरिवेटिव्स सीरीज बन गई। सितंबर 2001 में Nifty करीब 6.5% गिरा था।
इस दौरान Nifty करीब 1,400 अंक से ज्यादा नीचे आया। ऊंचे कच्चे तेल के दाम, कमजोर रुपया, बढ़ती बॉन्ड यील्ड और विदेशी निवेशकों की बिकवाली ने बाजार की धारणा पर दबाव बनाया।
FII ने बढ़ाए इंडेक्स पर शॉर्ट दांव
सबसे ज्यादा ध्यान विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी FII की derivatives positioning पर है।
Economic Times के मुताबिक सितंबर सीरीज में FII index shorts 41.9% बढ़कर 2.95 लाख contracts हो गए, जो अगस्त के 2.08 लाख contracts से काफी ज्यादा हैं। यह उपलब्ध ट्रैक किए गए आंकड़ों में सबसे ऊंचा स्तर बताया गया है।
इसके मुकाबले FII index longs सिर्फ 16.9% बढ़कर 27,879 contracts हुए। नतीजतन FII का net index short position सितंबर सीरीज की शुरुआत के करीब 1.84 लाख contracts से बढ़कर 2.67 लाख contracts हो गया।
सिर्फ इंडेक्स पर ही नहीं, विदेशी निवेश में भी दबाव
FII की सतर्कता केवल futures positioning तक सीमित नहीं रही। सितंबर सीरीज के दौरान विदेशी निवेशकों ने भारतीय equities से करीब 3 अरब डॉलर की निकासी की। हालांकि individual stocks के futures में FII अभी भी net long बने हुए हैं।
Reuters के मुताबिक सितंबर में विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयरों के spot market से करीब 2.7 अरब डॉलर निकाले। वहीं domestic institutional investors की खरीदारी ने गिरावट के दबाव को कुछ हद तक कम किया।
अक्टूबर सीरीज में भी बना हुआ है दबाव
नई अक्टूबर F&O सीरीज में भी विदेशी निवेशकों की positioning बाजार में सावधानी का संकेत दे रही है। Reuters के मुताबिक FII net Nifty index-futures shorts पिछली expiry के करीब 1.84 लाख contracts से बढ़कर लगभग 2.67 लाख contracts हो गए हैं। Nifty futures का open interest भी सितंबर की शुरुआत से करीब 30% बढ़ा।
ब्रोकरेज रिपोर्टों में Nifty के लिए करीब 22,350–22,500 का क्षेत्र अहम support zone बताया गया है। वहीं 23,300–23,400 के आसपास resistance की बात कही गई है। ये स्तर विश्लेषकों के तकनीकी आकलन हैं, बाजार की गारंटी नहीं।
क्या निवेशकों को अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए?
FII की बढ़ती short positioning और लगातार कमजोर बाजार संकेत बताते हैं कि फिलहाल बाजार में जोखिम और volatility को लेकर सतर्कता बनी हुई है। लेकिन केवल FII shorts के आधार पर आगे बाजार किस दिशा में जाएगा, इसका निश्चित निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।
आने वाले दिनों में कच्चे तेल की कीमतें, वैश्विक बॉन्ड यील्ड, विदेशी निवेशकों की खरीद-बिक्री और Nifty के प्रमुख technical levels बाजार की दिशा के लिए महत्वपूर्ण रहेंगे।
डिस्क्लेमर: यह खबर बाजार के उपलब्ध आंकड़ों और रिपोर्टों पर आधारित है। इसे निवेश सलाह न माना जाए। शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है।