बारिश के कई दिन बाद बढ़ा गोमती का जलस्तर
लखनऊ में गोमती नदी का जलस्तर भारी बारिश खत्म होने के कई दिनों बाद बढ़ा। इसकी एक वजह नदी के ऊपरी कैचमेंट में हुई बारिश और वहां से आने वाला पानी बताया जा रहा है।
रिपोर्ट के मुताबिक, ऊपरी इलाकों से बारिश का पानी गोमती के रास्ते लखनऊ तक पहुंचने में करीब 8 से 10 दिन ले सकता है। इसी वजह से शहर में बाढ़ का असर बारिश के तुरंत बाद नहीं, बल्कि कुछ दिनों बाद दिखाई दिया।
फैजुल्लागंज समेत कई इलाकों में जलभराव
गोमती का जलस्तर बढ़ने से लखनऊ के निचले इलाकों में बाढ़ और जलभराव की स्थिति बनी। फैजुल्लागंज, घैला और दाउद नगर जैसे इलाकों में पानी पहुंचने से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा।
इन इलाकों में बड़ी संख्या में घरों के प्रभावित होने की बात सामने आई है।
गोमती के फ्लडप्लेन पर बढ़ता शहरीकरण
लखनऊ में बाढ़ की मौजूदा स्थिति ने नदी के आसपास हुए लंबे समय के शहरी विस्तार पर भी सवाल खड़े किए हैं।
जिन इलाकों में कभी गोमती के बढ़े हुए पानी को फैलने की प्राकृतिक जगह मिलती थी, उनमें समय के साथ निर्माण और शहरीकरण बढ़ा है। ऐसे में नदी का जलस्तर बढ़ने पर पानी के फैलाव के लिए उपलब्ध प्राकृतिक क्षेत्र सीमित हो सकते हैं।
नदी को फैलने की जगह क्यों जरूरी?
नदियों के किनारे मौजूद फ्लडप्लेन बारिश या ऊपरी क्षेत्रों से आने वाले अतिरिक्त पानी को कुछ समय के लिए फैलने और जमा होने की प्राकृतिक जगह देते हैं।
अगर इन क्षेत्रों में लगातार निर्माण और शहरीकरण होता है, तो बाढ़ के दौरान पानी के लिए उपलब्ध जगह कम हो सकती है और आसपास के आबादी वाले इलाकों पर इसका असर बढ़ सकता है।
लखनऊ की बाढ़ ने उठाया बड़ा सवाल
गोमती में बढ़ते जलस्तर के बाद लखनऊ की मौजूदा स्थिति सिर्फ एक बारिश की घटना नहीं, बल्कि शहर और नदी के बीच बदलते रिश्ते पर भी चर्चा का विषय बन गई है।
अब सवाल यह है कि भविष्य में बढ़ते शहरीकरण के बीच गोमती के प्राकृतिक फ्लडपेन और जलनिकासी व्यवस्था को किस तरह सुरक्षित रखा जाए, ताकि बाढ़ का असर कम किया जा सके।
⚠️ जरूरी सूचना: बाढ़ की स्थिति पर मौसम, नदी के जलस्तर और ऊपरी कैचमेंट से आने वाले पानी का लगातार असर पड़ सकता है। शहरीकरण और बाढ़ के बीच संबंध एक व्यापक पर्यावरणीय और नियोजन विषय है, इसलिए किसी एक कारण को मौजूदा जलभराव के लिए अकेले जिम्मेदार नहीं माना जाना चाहिए।