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लखनऊ में बिरयानी विक्रेता से मारपीट, प्रतिबंधित मीट के आरोप पर पुलिस ने सैंपल जांच के लिए भेजा

लखनऊ के इटौंजा इलाके में बिरयानी विक्रेता रिजवान के साथ कथित मारपीट का मामला सामने आया है। पुलिस के मुताबिक, तीन लोगों ने उसे प्रतिबंधित मीट ले जाने का आरोप लगाकर रोका और मारपीट व जान से मारने की धमकी दी। पुलिस ने मीट का सैंपल जांच के लिए भेजा है।
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मीट ले जा रहे बिरयानी विक्रेता को रोका

लखनऊ के इटौंजा इलाके में बिरयानी का ठेला लगाने वाले 40 वर्षीय रिजवान के साथ कथित मारपीट का मामला सामने आया है। पुलिस के अनुसार, घटना रविवार सुबह करीब 8:30 बजे की है।

रिजवान महोना इलाके में बिरयानी का ठेला लगाते हैं। पुलिस के मुताबिक, वह अपने काम के लिए मीट लेकर जा रहे थे, तभी कुछ लोगों ने उन्हें रोक लिया और मीट को प्रतिबंधित बताते हुए सवाल-जवाब शुरू कर दिए।

तीन लोगों पर FIR

रिजवान की शिकायत के आधार पर पुलिस ने राणा यादव, शानू और सूरज के खिलाफ मामला दर्ज किया है। आरोप है कि तीनों ने उनके साथ गाली-गलौज और मारपीट की तथा जान से मारने की धमकी दी।

रिजवान के मुताबिक, हमलावरों ने उन्हें लात-घूंसों और बेल्ट से पीटा। घटना के बाद उन्होंने इटौंजा थाने पहुंचकर लिखित शिकायत दी।

पुलिस ने मामले में भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत FIR दर्ज की है। फिलहाल उपलब्ध ताजा रिपोर्टों के अनुसार तीनों आरोपियों की गिरफ्तारी की पुष्टि नहीं हुई है।

मीट का सैंपल जांच के लिए भेजा

घटना के बाद पुलिस ने रिजवान के पास मौजूद मीट को कब्जे में लिया और उसका सैंपल पशु चिकित्सा अधिकारी को जांच के लिए भेजा है।

पुलिस के मुताबिक, अभी यह निर्धारित नहीं हुआ है कि मीट प्रतिबंधित था या नहीं। जांच रिपोर्ट आने के बाद इस संबंध में आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

वीडियो भी सामने आया

घटना से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया है, जिसमें एक व्यक्ति के साथ कुछ लोग मारपीट करते दिखाई दे रहे हैं। पुलिस उपलब्ध वीडियो और अन्य सबूतों की भी जांच कर रही है।

घटना के बाद पुलिस ने इलाके में स्थिति सामान्य और शांतिपूर्ण होने की बात कही है। मामले की जांच जारी है।

⚠️ जरूरी सूचना: मीट के प्रतिबंधित होने की पुष्टि अभी जांच रिपोर्ट से होनी बाकी है। इसी तरह आरोपियों के खिलाफ लगाए गए आरोप पुलिस केस का हिस्सा हैं और अदालत में साबित होना बाकी है। वीडियो की मौजूदगी अपने आप में घटना की पूरी परिस्थितियों या आरोपों को अंतिम रूप से साबित नहीं करती।

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