हादसों के डेटा से तैयार होगा नया रोड सेफ्टी प्लान
लखनऊ पुलिस अब सिर्फ सड़क हादसों की संख्या दर्ज करने के बजाय उनके पीछे के पैटर्न और कारणों को समझने के लिए डेटा का इस्तेमाल करेगी। इसके लिए PRAMAAN (Police Road Accident Monitoring, Assurance and Analytics Network) नाम से पांच सदस्यीय टीम बनाई गई है।
टीम जनवरी 2024 से कमिश्नरेट में दर्ज सड़क हादसों की FIR का विश्लेषण करेगी। दुर्घटनाओं से जुड़े करीब 25 प्रमुख बिंदुओं का डेटा एक केंद्रीय डेटाबेस में तैयार किया जाएगा।
इसमें हादसे की जगह, समय, शामिल वाहन, टक्कर का प्रकार, मृतक और घायलों की संख्या, सड़क की श्रेणी और हादसा चौराहे पर हुआ या सड़क के बीच वाले हिस्से में, जैसी जानकारियां शामिल होंगी।
कहां और क्यों हो रहे हैं हादसे, पता लगाएगी टीम
पुलिस इस डेटा को केंद्र के e-DAR/iRAD दुर्घटना डेटाबेस से भी मिलाएगी। इसका उद्देश्य रिकॉर्ड में मौजूद गलत, अधूरी या असंगत जानकारी को पहचानना और हादसों वाले स्थानों की सही तस्वीर तैयार करना है।
जिन स्थानों पर बार-बार या गंभीर हादसे सामने आएंगे, वहां मौके पर जाकर निरीक्षण किया जाएगा। पुलिस सड़क की बनावट, रोशनी, विजिबिलिटी, साइनेज, डिवाइडर और कट, पैदल यात्रियों की आवाजाही, पार्किंग और चौराहे की डिजाइन जैसी चीजों को देखेगी।
जरूरत पड़ने पर ड्रोन तस्वीरों, जियो-स्पेशियल विश्लेषण, फोटो और वीडियो का भी इस्तेमाल किया जा सकता है।
गोसाईंगंज में सामने आए 18 हाई-रिस्क स्थान
PRAMAAN का पायलट प्रोजेक्ट गोसाईंगंज में किया गया। जनवरी 2024 से जून 2026 के बीच के आंकड़ों में वहां 191 सड़क हादसे और 104 मौतें दर्ज हुईं।
विश्लेषण के बाद 18 ऐसे स्थानों की पहचान की गई, जिन्हें आगे जांच के लिए हाई-रिस्क माना गया है। इन स्थानों का निरीक्षण कर हादसों के संभावित कारणों और जरूरी सुधारों पर काम किया जाएगा।
सड़क पर क्या-क्या बदलाव हो सकते हैं?
पुलिस के विश्लेषण के आधार पर अलग-अलग जगहों के लिए अलग समाधान सुझाए जाएंगे। इनमें रोड मार्किंग, नए साइनेज और लक्षित ट्रैफिक प्रवर्तन जैसे तत्काल कदम शामिल हो सकते हैं।
जहां बड़े स्तर पर बदलाव की जरूरत होगी, वहां चौराहे का पुनर्गठन, सर्विस रोड या अंडरपास जैसी इंजीनियरिंग परियोजनाओं की सिफारिश की जा सकती है। समस्या के अनुसार रिपोर्ट NHAI, PWD, LDA, नगर निगम, परिवहन विभाग या ट्रैफिक पुलिस को भेजी जाएगी।
हादसे की सूचना से लेकर डेटा तक निगरानी
PRAMAAN में सिर्फ पुराना रिकॉर्ड ही नहीं, बल्कि नए हादसों की जानकारी भी शामिल की जा रही है। जुलाई से FIR, UP-112, ट्रैफिक सोशल मीडिया सेल और ट्रैफिक पुलिस हेल्पलाइन से मिलने वाली दुर्घटना सूचनाओं की रोजाना निगरानी की जा रही है।
UP-112 की टीमों को हादसे वाली जगह की फोटो, वीडियो और दूसरी जरूरी जानकारी सुरक्षित रखने के निर्देश दिए गए हैं। तेज समन्वय के लिए संबंधित टीमों के बीच एक कॉमन WhatsApp ग्रुप भी बनाया गया है।
निष्कर्ष: PRAMAAN के जरिए लखनऊ पुलिस सड़क हादसों के आंकड़ों को सिर्फ रिकॉर्ड रखने के बजाय उन जगहों और कारणों की पहचान के लिए इस्तेमाल कर रही है, जहां सड़क सुरक्षा में सुधार की जरूरत है।