किराए के मकान में अलग-अलग कमरों में मिले शव
राजस्थान के धौलपुर शहर में सोमवार को एक दंपती अपने किराए के मकान में अलग-अलग कमरों में फंदे से लटके मिले। मृतकों की पहचान करौली जिले के नादौती इलाके के रहने वाले बलराम मीणा और उनकी पत्नी सरोज मीणा के रूप में हुई है। दोनों करीब ढाई साल से धौलपुर में किराए के मकान में रह रहे थे।
बलराम यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी में मैनेजर के पद पर कार्यरत थे। पुलिस के मुताबिक, वह 21 सितंबर से कार्यालय नहीं गए थे और इस पहलू की भी जांच की जा रही है।
बच्चों के स्कूल जाने के बाद सामने आया मामला
पुलिस के अनुसार, दंपती का छोटा बेटा और बलराम के बड़े भाई का बेटा सोमवार सुबह स्कूल गए थे। बाद में घर लौटने पर मकान का दरवाजा नहीं खुला। इसके बाद आसपास के लोगों को जानकारी हुई और पुलिस को सूचना दी गई।
पुलिस और फोरेंसिक टीम मौके पर पहुंची और घटनास्थल से जरूरी साक्ष्य जुटाए। दोनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया।
डायरी में मिले कई नोट
पुलिस को बलराम की एक डायरी मिली है, जिसमें कई पन्नों पर परिवार और दोस्तों के लिए अलग-अलग संदेश लिखे होने की जानकारी सामने आई है। पुलिस के मुताबिक, नोट में आर्थिक लेन-देन से जुड़ी कुछ जानकारियां भी थीं।
रिपोर्टों के मुताबिक, बलराम ने अपने दोस्त पुष्पेंद्र से बेटे का ध्यान रखने की बात भी लिखी थी। पुलिस इन सभी जानकारियों को जांच का हिस्सा बना रही है।
मौत से पहले सोशल मीडिया पर लगाए थे स्टेटस
पुलिस के अनुसार, बलराम ने सोमवार दोपहर करीब 12:59 बजे WhatsApp पर तीन स्टेटस लगाए थे। इनमें दो में उनकी और उनकी पत्नी की तस्वीरें थीं, जबकि आखिरी स्टेटस में ‘अंतिम जोहार’ लिखा था। इसके बाद उनके दोस्त पुष्पेंद्र ने उनसे संपर्क करने की कोशिश की और घर पहुंचकर पुलिस को सूचना दी।
मौत की वजह की जांच जारी
पुलिस फिलहाल यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि दंपती की मौत के पीछे क्या वजह थी। परिवार के सदस्यों, पड़ोसियों, दोस्तों और बलराम के सहकर्मियों से जानकारी जुटाई जा रही है। फोरेंसिक साक्ष्यों और डिजिटल जानकारी की भी जांच की जा रही है।
एक रिपोर्ट के मुताबिक, बलराम के कार्यालय से जुड़ी कुछ वित्तीय अनियमितता की जानकारी भी जांच के दायरे में आई है, लेकिन इसका दंपती की मौत से संबंध अभी पुलिस ने स्थापित नहीं किया है।
⚠️ जरूरी सूचना: पुलिस जांच जारी है और मौत की वजह अभी आधिकारिक रूप से स्पष्ट नहीं हुई है। इसलिए किसी भी संभावित कारण को अंतिम तथ्य के रूप में पेश करना उचित नहीं होगा।