लखनऊ में पार्किंग विवाद ने लिया खूनी रूप
लखनऊ के सआदतगंज थाना क्षेत्र में सोमवार, 26 अक्टूबर 2026 को कार पार्किंग को लेकर हुए विवाद में तीन लोगों की जान चली गई। नौबस्ता के ब्राह्मणी टोला इलाके में दो पड़ोसी परिवारों के बीच शुरू हुई कहासुनी गोलीबारी में बदल गई।
पुलिस के मुताबिक, सुबह करीब 10:30 बजे खाली जमीन पर गाड़ी खड़ी करने को लेकर विवाद हुआ। आरोप है कि इसी दौरान ऋषभ शुक्ला नाम के युवक ने दूसरे पक्ष पर ताबड़तोड़ गोलियां चला दीं।
पिता और चाचा की मौके पर मौत, बेटे ने अस्पताल में तोड़ा दम
गोलीबारी में शिवाजी तिवारी, उनके भाई शिवेंद्र तिवारी और बेटे सुयश तिवारी गंभीर रूप से घायल हुए।
शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार, शिवाजी और शिवेंद्र की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि सुयश को गंभीर हालत में केजीएमयू के ट्रॉमा सेंटर पहुंचाया गया। इलाज के दौरान सुयश ने भी दम तोड़ दिया।
इस तरह घटना में मरने वालों की संख्या तीन हो गई।
कुछ शुरुआती रिपोर्टों में शंभू नाम के एक अन्य व्यक्ति के घायल होने की जानकारी भी सामने आई है। हालांकि, उनकी स्थिति को लेकर अलग-अलग रिपोर्टों में अंतर है।
आरोपी ऋषभ शुक्ला गिरफ्तार, पिस्टल बरामद
डीसीपी पश्चिम जितेंद्र कुमार श्रीवास्तव के अनुसार, गोलीबारी के आरोपी ऋषभ शुक्ला को पुलिस ने हिरासत में ले लिया है।
पुलिस ने कथित तौर पर वारदात में इस्तेमाल पिस्टल और चार खाली कारतूस भी बरामद किए हैं।
आरोपी से पूछताछ के साथ पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि पार्किंग को लेकर विवाद कैसे शुरू हुआ और गोलीबारी तक कैसे पहुंचा।
इलाके में पुलिस बल तैनात
घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस अधिकारी और पुलिस बल मौके पर पहुंचे। घटनास्थल की घेराबंदी कर जांच शुरू की गई।
तीन लोगों की मौत के बाद इलाके में तनाव की स्थिति को देखते हुए पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई। पुलिस के अनुसार, फिलहाल इलाके में स्थिति नियंत्रण में है।
पुलिस जांच में सामने आएंगे विवाद के बाकी पहलू
शुरुआती जानकारी में कार पार्किंग और खाली जमीन के इस्तेमाल को लेकर विवाद की बात सामने आई है।
पुलिस इस मामले में घटनाक्रम, हथियार और आरोपी की भूमिका से जुड़े तथ्यों की जांच कर रही है। पीड़ित पक्ष की शिकायत के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
⚠️ जरूरी सूचना: यह रिपोर्ट 26 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित समाचारों और पुलिस के हवाले से सामने आई जानकारी पर आधारित है। शुरुआती रिपोर्टों में मृतकों की उम्र और एक अन्य घायल की स्थिति को लेकर अंतर है। जांच पूरी होने तक आरोपी के खिलाफ आरोपों को अंतिम रूप से सिद्ध नहीं माना जाना चाहिए।
स्रोत: दैनिक जागरण, पीटीआई और टाइम्स ऑफ इंडिया, 26 अक्टूबर 2026।