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पासपोर्ट और आधार रद्द करने की मांग, CJP नेता सौरव दास की नागरिकता की जांच को लेकर मद्रास हाईकोर्ट में PIL

मद्रास हाईकोर्ट में दायर जनहित याचिका में CJP नेता और पत्रकार सौरव दास की पहचान, नागरिकता और पारिवारिक पृष्ठभूमि की जांच की मांग की गई है। याचिका में उनके सोशल मीडिया अकाउंट ब्लॉक करने की मांग भी शामिल है।
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मद्रास हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार और सौरव दास को नोटिस जारी किया

मद्रास हाईकोर्ट ने 30 अक्टूबर 2026 को कॉकroach जनता पार्टी (CJP) के प्रवक्ता और पत्रकार सौरव दास की पहचान एवं पृष्ठभूमि की जांच की मांग वाली जनहित याचिका पर सुनवाई की। अदालत की पीठ में मुख्य न्यायाधीश एस. ए. धर्माधिकारी और न्यायमूर्ति जी. अरुल मुरुगन शामिल थे।

पीठ ने केंद्र सरकार, संबंधित अधिकारियों और सौरव दास सहित प्रतिवादियों से जवाब मांगा है। मामले में अगली सुनवाई छह सप्ताह बाद होने की बात रिपोर्ट में कही गई है। अदालत ने फिलहाल याचिका में लगाए गए आरोपों पर कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया है। <Cite refs={["turn475043search0","turn475043search2"]}/>

याचिका में पहचान और नागरिकता की जांच की मांग

चेन्नई के निवासी आर. गणेश कुमार ने यह याचिका दायर की है। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया है कि सौरव दास की पहचान और पारिवारिक पृष्ठभूमि की विस्तृत जांच होनी चाहिए। याचिका में उनके नाम को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं और संबंधित सरकारी दस्तावेजों की जांच की मांग की गई है।

याचिकाकर्ता ने केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय और अन्य संबंधित अधिकारियों से मामले की जांच कराने का अनुरोध किया है। हालांकि, ये सभी दावे याचिका में लगाए गए आरोप हैं; इन्हें अदालत द्वारा प्रमाणित तथ्य नहीं माना जा सकता। <Cite refs={["turn475043search1","turn475043search5"]}/>

पासपोर्ट और आधार कार्ड रद्द करने की भी मांग

याचिका में मांग की गई है कि यदि जांच में सौरव दास के भारतीय नागरिक न होने की पुष्टि होती है, तो कानून के अनुसार उनके पासपोर्ट और आधार कार्ड को लेकर आवश्यक कार्रवाई की जाए।

इसके अलावा, याचिकाकर्ता ने अधिकारियों से उनके परिवार की पृष्ठभूमि की जांच करने का अनुरोध भी किया है। अदालत ने अभी इन मांगों को स्वीकार करने का अंतिम आदेश नहीं दिया है, बल्कि संबंधित पक्षों से जवाब मांगा है। <Cite refs={["turn475043search1","turn475043search3"]}/>

सोशल मीडिया अकाउंट ब्लॉक करने की मांग

याचिका में सौरव दास के X (पूर्व में ट्विटर) और Instagram अकाउंट ब्लॉक करने की मांग भी की गई है। याचिकाकर्ता का आरोप है कि दास ने सोशल मीडिया पर न्यायपालिका, भारत के मुख्य न्यायाधीश और सुप्रीम कोर्ट के अन्य न्यायाधीशों के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणियां की हैं।

याचिकाकर्ता के वकील ने अदालत को बताया कि इस संबंध में संबंधित अधिकारियों को 7 अक्टूबर को शिकायत दी गई थी, लेकिन उनके अनुसार उस पर कार्रवाई नहीं हुई। इसी के बाद हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई। <Cite refs={["turn475043search0","turn475043search5"]}/>

अब आगे क्या होगा?

हाईकोर्ट ने संबंधित पक्षों से जवाब मांगा है। आगे की सुनवाई में याचिका में उठाए गए सवालों और संबंधित पक्षों के जवाब पर विचार किया जाएगा। फिलहाल सौरव दास की नागरिकता या पहचान को लेकर अदालत की ओर से कोई अंतिम फैसला सामने नहीं आया है।

⚠️ जरूरी सूचना: यह मामला अभी न्यायिक प्रक्रिया में है। पहचान, नागरिकता और सोशल मीडिया टिप्पणियों से जुड़े आरोप याचिकाकर्ता के दावे हैं। इन्हें अदालत द्वारा सिद्ध तथ्य के रूप में प्रस्तुत करना उचित नहीं होगा।

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