सुप्रीम कोर्ट में केंद्र का बड़ा बयान
केंद्र सरकार ने गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट को बताया कि वह University Grants Commission (UGC) के 2026 के इक्विटी नियमों पर दोबारा विचार करने के लिए एक कमेटी बनाने की योजना बना रही है।
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने तीन जजों की पीठ के सामने कहा कि सरकार कमेटी गठित करने पर विचार कर रही है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने भी सरकार से नियमों पर दोबारा विचार करने को कहा था।
किन नियमों पर विवाद है?
UGC के Promotion of Equity in Higher Education Institutions Regulations, 2026 में उच्च शिक्षण संस्थानों में भेदभाव से निपटने के प्रावधान किए गए थे।
विवाद खास तौर पर नियम 3(1)(c) की परिभाषा को लेकर है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि इसमें जाति आधारित भेदभाव की विशेष परिभाषा में SC, ST और OBC समुदायों का उल्लेख है, जबकि सामान्य वर्ग के छात्रों और शिक्षकों को उसी तरह की स्पष्ट सुरक्षा नहीं मिलती।
हालांकि नियमों में भेदभाव की व्यापक परिभाषा के तहत जाति के आधार पर किसी भी हितधारक के साथ अनुचित या अलग व्यवहार को शामिल किया गया है।
सुप्रीम कोर्ट ने जनवरी में नियमों पर लगाई थी रोक
सुप्रीम कोर्ट ने 29 जनवरी 2026 को इन नियमों को रोक दिया था। अदालत ने कहा था कि नियमों में कुछ अस्पष्टताएं हैं और इनके व्यापक प्रभाव हो सकते हैं। अदालत ने केंद्र और UGC से जवाब भी मांगा था।
फिलहाल 2026 के नए नियम लागू नहीं हैं और मामले पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई जारी है।
यूपी चुनाव से पहले राजनीतिक चर्चा
UGC के नियमों को लेकर सामान्य वर्ग के कुछ संगठनों और दलित तथा OBC समुदायों के कुछ वर्गों की ओर से भी आपत्तियां सामने आई हैं। उत्तर प्रदेश में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं, इसलिए इस मुद्दे का राजनीतिक महत्व भी बढ़ गया है।
हालांकि, केंद्र द्वारा कमेटी बनाने की योजना को चुनावी रणनीति के रूप में पेश करना एक राजनीतिक विश्लेषण है। सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में फिलहाल नियमों की दोबारा समीक्षा के लिए कमेटी बनाने की बात कही है।
⚠️ जरूरी सूचना: “BJP चुनाव से पहले समय खरीद रही है” जैसी बात राजनीतिक विश्लेषण और अटकल के रूप में सामने आई है। केंद्र की ओर से आधिकारिक तौर पर इसे चुनावी रणनीति नहीं बताया गया है।