आकाश आनंद की वापसी पर मायावती ने रखी शर्त
लखनऊ। बहुजन समाज पार्टी (BSP) प्रमुख मायावती ने अपने भतीजे आकाश आनंद को लेकर एक बार फिर बड़ा राजनीतिक फैसला सामने रखा है। मायावती ने कहा है कि आकाश आनंद को पार्टी में स्वतंत्र रूप से काम करने और उनकी छीनी गई जिम्मेदारियां वापस देने पर तभी सहानुभूतिपूर्वक विचार किया जाएगा, जब उनके ससुर अशोक सिद्धार्थ पूरी तरह राजनीति से संन्यास ले लें।
मायावती ने बुधवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कई पोस्ट के जरिए अपनी बात रखी। उन्होंने अशोक सिद्धार्थ पर पार्टी और आंदोलन से ऊपर व्यक्तिगत व पारिवारिक हितों को प्राथमिकता देने का आरोप भी लगाया।
आकाश आनंद को फिर मिल सकती है बड़ी जिम्मेदारी
मायावती की ताजा टिप्पणी से यह संकेत मिलता है कि आकाश आनंद के लिए BSP में बड़े रोल की संभावना पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। हालांकि, इसके लिए उन्होंने स्पष्ट शर्त रखी है।
मायावती के मुताबिक, अगर अशोक सिद्धार्थ राजनीति से पूरी तरह अलग हो जाते हैं, तो आकाश आनंद पार्टी में स्वतंत्र रूप से काम कर सकेंगे। इसके बाद पार्टी उनकी पहले छीनी गई जिम्मेदारियां बहाल करने पर विचार कर सकती है।
कुछ दिन पहले ही आकाश से छीनी गई थी बड़ी जिम्मेदारी
यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब कुछ ही दिन पहले मायावती ने आकाश आनंद को पार्टी में बड़ी जिम्मेदारी देने से इनकार किया था।
3 सितंबर को BSP की राष्ट्रीय स्तर की बैठक के बाद मायावती ने कहा था कि आकाश आनंद को अभी और राजनीतिक परिपक्वता हासिल करने की जरूरत है और फिलहाल उन्हें पार्टी में कोई बड़ी जिम्मेदारी देना उचित नहीं होगा।
इसके बाद आकाश आनंद की पार्टी संगठन में भूमिका कमजोर हुई और उनका नाम पार्टी की नई संगठनात्मक सूची से भी गायब रहा। बाद में उन्होंने अपने सोशल मीडिया बायो में खुद को “BSP supporter” बताया था।
अशोक सिद्धार्थ को लेकर मायावती का सख्त रुख
मायावती ने अपने बयान में अशोक सिद्धार्थ से व्यक्तिगत राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं को छोड़कर पूरी तरह राजनीति से अलग होने की अपील की है।
उन्होंने कहा कि ऐसा कदम आकाश आनंद के राजनीतिक भविष्य और पार्टी संगठन—दोनों के हित में होगा। मायावती ने यह भी कहा कि BSP के सामने उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पंजाब के आगामी विधानसभा चुनावों के रूप में महत्वपूर्ण राजनीतिक चुनौतियां हैं।
BSP में परिवारवाद को लेकर भी मायावती का संदेश
मायावती ने अपने बयान में BSP संस्थापक कांशीराम के सिद्धांतों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि पार्टी में रिश्तेदारी के आधार पर महत्वपूर्ण पद दिए जाने के बजाय संगठन और आंदोलन के हित को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
आकाश आनंद को पहले मायावती के राजनीतिक उत्तराधिकारी के तौर पर भी देखा जाता रहा है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में उनकी पार्टी में भूमिका कई बार बदली है। सितंबर 2026 में यह एक बार फिर BSP की आंतरिक राजनीति का बड़ा मुद्दा बन गया है।