जब धीरूभाई अंबानी ने कहा- मैं ही वह बुलबुला हूं जो फूट गया
जून 1985 में धीरूभाई अंबानी ने Reliance को लेकर पहले की गई आलोचनाओं का जवाब एक चर्चित अंदाज में दिया था। India Today Magazine में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने कहा था, “I am the bubble that burst” यानी “मैं ही वह बुलबुला हूं जो फूट गया।”
यह बयान उस दौर में आया, जब Reliance तेजी से आगे बढ़ रही थी और कंपनी की कारोबारी क्षमता को लेकर पहले सवाल उठाए जा चुके थे।
₹1,000 का निवेश कैसे पहुंचा ₹50,000 से ऊपर?
Reliance ने 1977 में अपना IPO जारी किया था। उपलब्ध रिपोर्ट के मुताबिक, उस समय कंपनी के शेयरों में लगाए गए ₹1,000 के निवेश की कीमत 1985 तक ₹50,000 से ज्यादा हो गई थी। इसके अलावा निवेशकों को हजारों रुपये के लाभांश मिलने की भी बात कही गई है।
उस दौर में आम भारतीय परिवारों के लिए शेयर बाजार में निवेश करना और कुछ ही वर्षों में बड़ी संपत्ति बनाना एक बड़ी उपलब्धि मानी जाती थी। ऐसे में Reliance के शुरुआती निवेशकों के लिए यह रिटर्न खास मायने रखता था।
हालांकि, वास्तविक रिटर्न इस बात पर निर्भर करता था कि निवेशक के पास कितने शेयर थे, कंपनी के कॉरपोरेट एक्शन क्या रहे और लाभांश का हिसाब किस तरह किया गया।
आम निवेशकों को मिला बड़ा मौका
धीरूभाई अंबानी की कारोबारी सोच का एक अहम पहलू आम निवेशकों को कंपनी से जोड़ना था। Reliance ने ऐसे समय में शेयर बाजार से पूंजी जुटाई, जब देश के औद्योगिक क्षेत्र में स्थापित कारोबारी घरानों का प्रभाव काफी मजबूत था।
कंपनी की वृद्धि के साथ उसके शेयरधारकों की संख्या और निवेशकों के बीच उसकी पहचान भी बढ़ी। Reliance की कहानी ने कई लोगों को यह समझने का मौका दिया कि शेयर बाजार में निवेश कारोबार की वृद्धि में भागीदारी का एक रास्ता हो सकता है।
Reliance से Jio तक का सफर
धीरूभाई अंबानी ने Reliance को टेक्सटाइल कारोबार से आगे बढ़ाकर एक बड़े औद्योगिक समूह के रूप में विकसित करने की नींव रखी। बाद में समूह ने पेट्रोकेमिकल्स, ऊर्जा, रिटेल और दूरसंचार जैसे क्षेत्रों में विस्तार किया।
Reliance Jio ने भारतीय टेलीकॉम बाजार में डेटा और मोबाइल सेवाओं को लेकर प्रतिस्पर्धा को नई दिशा दी। अब समूह की कंपनियों और उनके संभावित सार्वजनिक निर्गमों को लेकर निवेशकों की दिलचस्पी बनी रहती है। हालांकि, किसी भी IPO में निवेश का निर्णय कंपनी के आधिकारिक दस्तावेजों और जोखिमों को समझकर ही लेना चाहिए।
क्या आज भी ऐसे रिटर्न की उम्मीद की जा सकती है?
Reliance के शुरुआती निवेशकों की कहानी प्रेरक जरूर है, लेकिन किसी पुराने निवेश का शानदार प्रदर्शन भविष्य में वैसे ही रिटर्न मिलने की गारंटी नहीं देता। शेयर बाजार में कंपनी की कमाई, मूल्यांकन, प्रतिस्पर्धा और आर्थिक परिस्थितियों के आधार पर निवेश का मूल्य घट या बढ़ सकता है।
⚠️ जरूरी सूचना: ₹1,000 से ₹50,000 से अधिक की कीमत वाला आंकड़ा उपलब्ध कराए गए लेख पर आधारित है। इसे पूरी तरह समझने के लिए 1977 के IPO मूल्य, शेयर विभाजन या बोनस जैसे कॉरपोरेट एक्शन और लाभांश के रिकॉर्ड की पुष्टि जरूरी है। यह लेख निवेश की सलाह नहीं है।